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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर रहेगा भद्र का साया, जानें किस समय करें महादेव का जलाभिषेक?

Mahashivratri 2026: हिंदू धर्म में भद्रा को अशुभ समय माना जाता है। इसमें कोई भी शुभ और नया काम नहीं किया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भद्र लग रही है। आइए जानें इस अशुभ अवधि में जलाभिषेक कर सकते हैं या नहीं और इसका समय क्या होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 12, 2026 पर 8:55 PM
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर रहेगा भद्र का साया, जानें किस समय करें महादेव का जलाभिषेक?
महाशिवरात्रि 2026 पर भद्रा 15 फरवरी की शाम को शुरू होगी और अगली सुबह तक रहेगी।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्री का पर्व आने वाला है। इस पर्व में बहुत से भक्त उपवास करते हैं और भगवान शिव के लिंग स्वरूप का विभिन्न प्रकार से अभिषेक करते हैं। पूरे दिन मंदिरों और शिवालयों में शिव भक्तों का तांता लगा रहता है और पूजा, दर्शन और अभिषेक करते रहते हैं। इस साल, इस पावन पर्व पर भद्रा काल लग रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्र को दिन के अशुभ समय के रूप में जाना जाता है। इसमें कोई नया या शुभ काम नहीं करते हैं। महाशिवरात्रि पर भद्रा लगने से भक्तों में भ्रम है कि महादेव का जलाभिषेक कैसे होगा? जलाभिषेक और चार पहर की पूजा का समय और विधान क्या रहेगा ? इन सारे सवालों का जवाब जानने के लिए आइए देखें

महाशिवरात्रि 2026 पर भद्रा काल

हिंदू ज्योतिष में, भद्रा को नए काम शुरू करने या शुभ काम के लिए अशुभ समय माना जाता है। ज्योतिष गणना के अनुसार महाशिवरात्रि 2026 पर भद्रा 15 फरवरी की शाम को शुरू होगी और अगली सुबह तक रहेगी।

भद्रा शुरू : 15 फरवरी शाम 5:04 बजे

भद्रा खत्म : 16 फरवरी सुबह 5:23 बजे

महाशिवरात्रि के अनुष्ठान पर असर नहीं

इस साल महाशिवरात्रि पर लग रही भद्रा का वास पाताल लोक में हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, भद्रा जब पाताल लोक में रहती है, तो इसका प्रभाव धरती और उसके कामकाज पर नहीं माना जाता है। इसलिए, भक्त बिना किसी बुरे नतीजे के डर के शिवलिंग का जलाभिषेक, व्रत और पूजा-पाठ जारी रख सकते हैं।

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