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Mokshada Ekadashi 2025: बहुत कठोर हैं मोक्षदा एकादशी व्रत के नियम, जानें इसका महत्व और एकादशी की तारीख

Mokshada Ekadashi 2025: शास्त्रों में इस एकादशी को मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि बताया गया है। इस दिन भगवान श्रीविष्णु की उपासना कर मोक्ष और पापों से मुक्ति की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से भक्त और उसकी सात पीढ़ियों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 29, 2025 पर 10:32 AM
Mokshada Ekadashi 2025: बहुत कठोर हैं मोक्षदा एकादशी व्रत के नियम, जानें इसका महत्व और एकादशी की तारीख
शास्त्रों में इस एकादशी को मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि बताया गया है।

Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है। ये दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन सच्चे मन से पूजा और व्रत करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शास्त्रों में इस एकादशी को मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि बताया गया है। इसी दिन श्रीमद्भगवद्गीता का जन्म हुआ था, इसलिए इसे गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीविष्णु की उपासना कर मोक्ष और पापों से मुक्ति की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से भक्त और उसकी सात पीढ़ियों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मोक्षदा एकादशी की तारीख

पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत रविवार, 30 नवंबर 2025 को रात 9:29 बजे होगी और इसका समापन सोमवार 1 दिसंबर 2025 को शाम 7:01 बजे होगा। चूंकि एकादशी व्रत उदया तिथि के आधार पर रखा जाता है, इसलिए व्रत 1 दिसंबर 2025 को ही रखा जाएगा। इस व्रत का पारण समय प्रातःकाल के बाद द्वादशी तिथि में होगा।

कठिन हैं इस व्रत के नियम

अन्न का त्याग : एकादशी में अन्न, लहसुन-प्याज और यहां तक कि चावल भी पूरी तरह वर्जित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाने से अगले जन्म में कीड़े-मकोड़े की योनि मिलती है। यह केवल फलाहार या निर्जला ही किया जाता है।

रात्रि जागरण और थकान : कई भक्त इस दिन रात्रि जागरण करते हैं और पूरी रात भगवान विष्णु के नाम भजन-कीर्तन करते हैं। शारीरिक थकान और अनुशासन का कठिन मिश्रण इसे और भी चुनौतीपूर्ण बना देता है।

ब्रह्मचर्य और मानसिक अनुशासन : एकादशी के व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, क्रोध, झूठ, निंदा, और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का सख्त नियम है।

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