Get App

Indian Railways: जब नहीं था AC, तब भी ट्रेन के कोच बर्फ की तरह रहते थे ठंडे, जानें कैसे

Indian Railways: गर्मी के मौसम में स्लीपर और जनरल कोच में यात्रा करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी विचार किया है कि जब ट्रेनों में एसी कोच नहीं होते थे, तब राजा-महाराजा और ब्रिटिश अधिकारी किस तरह सफर करते थे? उस समय गर्मी से बचने के लिए कौन-कौन से खास उपाय किए जाते थे? आइए जानते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 27, 2025 पर 11:53 AM
Indian Railways: जब नहीं था AC, तब भी ट्रेन के कोच बर्फ की तरह रहते थे ठंडे, जानें कैसे
Indian Railways: गर्मी से राहत देने के लिए 1872 में भारतीय रेलवे ने पहली बार एयर कूलिंग सिस्टम की शुरुआत की।

भारतीय रेलवे का सफर समय के साथ बेहद रोमांचक बदलावों से गुजरा है। एक दौर था जब ट्रेनें कोयले से चलती थीं और गर्मी में सफर करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। ना पंखे थे, ना एसी—यात्रियों को भीषण गर्मी से जूझना पड़ता था। राजा-महाराजाओं और अमीर तबके के लिए खास इंतजाम किए जाते थे, लेकिन आम लोगों के लिए यह सफर चुनौती भरा होता था। जैसे-जैसे तकनीक ने रफ्तार पकड़ी, रेलवे में सुविधाएं जुड़ती गईं। आज भारतीय ट्रेनों में अत्याधुनिक एसी कोच मौजूद हैं, जो सफर को सुहाना और आरामदायक बनाते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब ट्रेन में एसी नहीं था, तब लोग गर्मी से कैसे बचते थे? भारत में पहली बार कब और कहां एसी कोच की शुरुआत हुई थी? आइए जानते हैं भारतीय रेलवे में एसी के रोमांचक सफर की पूरी कहानी।

जब ट्रेनों में ठंडक का कोई इंतजाम नहीं था

1853 में जब भारत में पहली ट्रेन चली, तब उसमें गर्मी से बचने का कोई ठोस उपाय नहीं था। ब्रिटिश अधिकारी, राजा-महाराजा और आम यात्री सबको भीषण गर्मी झेलनी पड़ती थी। लंबी यात्राओं के दौरान गर्मी असहनीय हो जाती थी। खासतौर पर भारत की चिलचिलाती गर्मी में सफर करना किसी तपस्या से कम नहीं था।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें