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किसानों की जिंदगी बदलने वाली DeHaat खुद मुश्किल में दिख रही है, फंड की कमी और ऑडिटर्स की टिप्पणी ने बढ़ाई चिंता

इस स्टार्टअप के हाई-वैल्यू ऑपरेशन से जुड़ी कमियां सामने आ रही हैं। एंप्लॉयीज पर खर्च बहुत बढ़ जाने के बाद कंपनी को छंटनी का फैसला लेना पड़ा। कंपनी के कमजोर इनटर्नल प्रोसेस पर भी सवाल उठे हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड May 24, 2023 पर 2:38 PM
किसानों की जिंदगी बदलने वाली DeHaat खुद मुश्किल में दिख रही है, फंड की कमी और ऑडिटर्स की टिप्पणी ने बढ़ाई चिंता
DeHaat हिन्दी का शब्द है, जिसका अर्थ गांव या ग्रामीण इलाका होता है। इसकी शुरुआत 2012 में शशांक कुमार ने की थी।

ठीक एक साल पहले एग्रीटेक में DeHaat की कामयाबी की खूब चर्चा सुनने को मिलती थी। इस स्टार्टअप में Sequoia Capital और Naspers जैसे इननेवस्टर्स ने पैसे लगाए थे। यह स्टार्टअप एग्रीटेक इंडस्ट्री का पोस्टर बॉय बन चुका था। तेजी से बढ़ते इस स्टार्टअप के लिए यूनिकॉर्न का ताज ज्यादा दूर नहीं था। लेकिन, दूसरे स्टार्टअप्स की तरह DeHaat का रास्ता अब मुश्किल नजर आता है। बताया जाता है कि फंड तेजी से घट रहा है। अगर खर्च की रफ्तार पिछले साल की तरह रहती है तो यह पैसा मुश्किल से पांच महीने चलेगा। नए फंड जुटाने के लिए माहौल अभी सही नहीं नजर आ रहा। FY22 में देहात को 1,563.9 करोड़ रुपये लॉस हुआ था।

 मुश्किल की शुरुआत

इस स्टार्टअप के हाई-वैल्यू ऑपरेशन से जुड़ी कमियां सामने आ रही हैं। एंप्लॉयीज पर खर्च बहुत बढ़ जाने के बाद कंपनी को छंटनी का फैसला लेना पड़ा। कंपनी के कमजोर इनटर्नल प्रोसेस पर भी सवाल उठे हैं। रिकॉर्ड्स बताते हैं क कंपनी के पूर्व ऑडिटर ने कंपनी के इनवेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल उठाए थे। कामकाज में सुधार लाने के लिए अब निवेशक अब इसके आॉपरेशन पर जनर रख रहे हैं। हालांकि, इस स्टार्टअप के लिए संभावनाएं अभी दिख रही हैं।

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