उन्होंने महामारी से ठीक पहले यानी लगभग दो साल पहले का एक अनुभव साझा किया। दरअसल, जबलपुर की एक स्टूडेंट ने कोटा के जानेमाने एजुकेशन सेंटर में खुद को एनरोल कराया। वह सेंटर की ‘क्लासरूम स्टूडेंट’ थी। क्लास शुरू होने से पहले वह किताबें खरीदने के लिए कोटा में अपने हॉस्टल से बाहर निकली। बाहर एक अन्य कोचिंग इंस्टीट्यूट का एक काउंसलर टकरा गया, जिसने उसे अपना कंटेंट दिया। कुछ पुराने टॉपर्स के उदाहरण दिए, जिन्होंने उसके कंटेंट का इस्तेमाल किया था। दरअसल, वह 10वीं में 94 फीसदी नंबर के साथ स्कूल टॉपर थी। इस प्रकार कोचिंग सेंटर जानते हैं कि उन्हें किसे टारगेट करना है और कैसे करना है। आखिरकार उसे नीट में खासी अच्छी रैंक मिली और दोनों ही क्लासेज उसका प्रचार करने लगीं।