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"महिला के बॉडी स्ट्रक्चर को 'Fine' कहना यौन उत्पीड़न के बराबर...", केरल HC ने FIR रद्द करने से किया इनकार

Kerala High Court: केरल हाई कोर्ट ने कहा कि महिला की शारीरिक संरचना पर टिप्पणी करना यौन उत्पीड़न के समान है। अदालत ने कहा कि किसी महिला की शारीरिक संरचना पर टिप्पणी यौन दृष्टि से प्रेरित है। इसलिए यह यौन उत्पीड़न के तहत दंडनीय अपराध की कैटेगरी में आएगी

Akhileshअपडेटेड Jan 08, 2025 पर 6:06 PM
"महिला के बॉडी स्ट्रक्चर को 'Fine' कहना यौन उत्पीड़न के बराबर...", केरल HC ने FIR रद्द करने से किया इनकार
Kerala High Court: आरोपी महिला के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा था

Kerala High Court: केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी महिला के बॉडी स्ट्रक्चर (शारीरिक संरचना) पर कमेंट करना सेक्शुअल हैरेसमेंट यानी यौन उत्पीड़न के बराबर है। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी महिला की बॉडी स्ट्रक्चर पर टिप्पणी यौन दृष्टि से प्रेरित कमेंट है, जो सेक्शुअल हैरेसमेंट के तहत दंडनीय अपराध की कैटेगरी में आएगी। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने इस संबंध में केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) के एक पूर्व कर्मचारी की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में आरोपी ने उसी संगठन की एक महिला कर्मचारी द्वारा उसके खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न के मामले को रद्द करने का अनुरोध किया था।

'लाइव एंड लॉ' के मुताबिक, अदालत ने सोमवार (6 जनवरी) को अपने अहम फैसले में कहा कि एक व्यक्ति द्वारा एक महिला के शरीर की संरचना के बारे में टिप्पणी करना और उसे "फाइन (Fine)" कहना प्रथम दृष्टया यौन रूप से प्रेरित टिप्पणी है। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी 2013 से उसके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा था। फिर 2016-17 में उसने आपत्तिजनक संदेश और वॉयस कॉल भेजना शुरू कर दिया।

उसने दावा किया था कि KSEB और पुलिस में शिकायत के बावजूद वह उसे आपत्तिजनक मैसेज भेजता रहा। जब शिकायतकर्ता केरल राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के इलेक्ट्रिकल सेक्शन में काम कर रही थी, तब आरोपी ने यौन रूप से भड़काऊ टिप्पणी की थी। उसने कहा था कि महिला की "बॉडी स्ट्रक्चर ठीक है (body structure was fine)"। यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी ने उसके मोबाइल नंबर पर यौन रूप से भड़काऊ मैसेज भेजे।

इन धाराओं में केस दर्ज

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