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डेनियल काह्नमैन ने कहा था-किसी व्यक्ति के सोचने के तरीके को बदलने के मुकाबले ऑर्गेनाइजेशन के थिंकिंग प्रोसेस को बदलना आसान

डेनियल काह्नमैन की बुक 'थिंकिंग, फास्ट एंड स्लो' व्यक्ति के सोचने के तरीके के बारे में है। काह्नमैन ने कहा था कि उनकी किताब पढ़ लेने के बाद भी व्यक्ति के सोचने का तरीका बदल जाना मुमकिन नहीं है। इसकी वजह यह है कि थिंकिंग प्रोसेस को बदलना बहुत मुश्किल है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 29, 2024 पर 9:05 AM
डेनियल काह्नमैन ने कहा था-किसी व्यक्ति के सोचने के तरीके को बदलने के मुकाबले ऑर्गेनाइजेशन के थिंकिंग प्रोसेस को बदलना आसान
डेनियल कह्नमैन ने कहा था कि थिंकिंग से जुड़ा एक टेस्ट है, जिसे Cognitive Reflection कहा जाता है। हार्वर्ड में करीब 50 फीसदी स्टूडेंट्स इस टेस्ट में फेल कर जाते हैं।

डेनियल काह्नमैन (Daniel Kahneman) एक मनोवैज्ञानिक थे। लेकिन, उन्होंने इकोनॉमिक्स को पुनर्परिभाषित किया। उनकी बुक 'थिंकिंग, फास्ट एंड स्लो' (Thinking, Fast and Slow) का इनवेस्टर्स और बिजनेस लीडर्स पर काफी असर पड़ा। डिसिजन-मेकिंग और अनिश्चितता पर किए गए वर्क के लिए 2002 में उन्हें इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार मिला था। यह पुरस्कार उन्हें Amos Tversky के साथ दिया गया था। काह्नमैन का 27 मार्च को 90 साल की उम्र में निधन हो गया। मनीकंट्रोल की एन महालक्ष्मी से बातचीत में उन्होंने अपने वर्क, डिसीजन मेकिंग और करियर के बारे में कई बातें बताई थीं।

बुक पढ़ने से थिंकिंग प्रोसेस नहीं बदलता

अपनी बुक थिंकिंग, फास्ट एंड स्लो के बारे में उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि इस बुक को पढ़ने के बाद कोई व्यक्ति बेहतर तरीके से सोचना शुरू कर देगा। उन्होंने खुद को इस बात का उदाहरण बताया था। उन्होंने कहा था कि मैंने इस किताब को लिखा, लेकिन इससे मुझे बहुत फायदा नहीं हुआ। किताब लिखने के बाद भी आज मैं वही व्यक्ति हूं जो पहले था। मैं उसी तरीके से सोचता हूं जैसा पहले सोचता था।

व्यक्ति के सोचने के तरीके को बदलना मुश्किल

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