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चीन इकोनॉमिक क्राइसिस के साथ सामाजिक संकट में भी फंसा, जानिए क्या है पूरा मामला

चीन का समाज घटती जनसंख्या, वृद्धि होते लोग, तलाक की बढ़ती संख्या, कम शादियां, लैंगिक असंतुलन इत्यादि जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जिसका नतीजा श्रमिकों की संख्या में कमी, मजदूरी में वृद्धि, कम उत्पादकता, करदाताओं की संख्या में कमी और कंपनियों के मुनाफे में कमी के रूप में सामने आने लगा है। ये समस्याएं किसी भी आर्थिक संकट से बहुत गहरा और व्यापक है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 22, 2022 पर 7:40 AM
चीन इकोनॉमिक क्राइसिस के साथ सामाजिक संकट में भी फंसा, जानिए क्या है पूरा मामला
आर्थिक संकट के पीछे गहरा सामाजिक संकट बढ़ा रहा है चीन की मुश्किलें

भुवन भास्कर

इन सबका नतीजा यह हुआ कि चीन की अर्थव्यवस्था अब भी पटरी पर लौटने की जद्दोजहद कर रही है। जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), अमेरिकी फेड और कई यूरोपीय देशों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर महंगाई पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी है, चीन के सेंट्रल बैंक ने सबको चौंकाते हुए ब्याज दरों में कटौती की है क्योंकि चीन के लिए गिरती ग्रोथ रेट के नतीजे सिर्फ आर्थिक ही नहीं, राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी घातक हो सकते हैं। यहां मामला सिर्फ ब्याज दर का नहीं है।

चीन एक गहरे आर्थिक संकट में उतर चुका है। राष्ट्रपति शि जिनपिंग की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत दुनिया भर के कमजोर और जरूरतमंद देशों को अर्थव्यवस्था निर्माण के बहाने कर्ज के जाल में फंसाने की चीनी कोशिश अब पलट कर उसे ही फंसाने जा रही है। कोरोना काल में लगे झटके के कारण BRI योजना ज्यादातर देशों में ठप पड़ गई है और वे देश अब दिए गए कर्ज पर ब्याज लौटाने की हालत में भी नहीं हैं।

वर्जीनिया के विलियम एंड मैरी कॉलेज में एडडाटा के एग्जीक्युटिव डायरेक्टर डॉ. ब्रैड पार्क्स ने एक अध्ययन किया है यह जानने के लिए कि चीन ने वास्तव में BRI के तहत कितना कर्ज दिया है और इस कर्ज की प्रकृति क्या है?

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