Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में होमबायर्स के लिए किसी भी नई टैक्स राहत या इंसेंटिव का ऐलान नहीं किया। बजट से पहले उम्मीद थी कि सरकार हाउसिंग डिमांड को सपोर्ट करने के लिए कुछ कदम उठा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में होमबायर्स के लिए किसी भी नई टैक्स राहत या इंसेंटिव का ऐलान नहीं किया। बजट से पहले उम्मीद थी कि सरकार हाउसिंग डिमांड को सपोर्ट करने के लिए कुछ कदम उठा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
BASIC Home Loan के CEO और Co-Founder अतुल मोंगा का कहना है कि बजट में होम लोन ब्याज पर ज्यादा टैक्स बेनिफिट और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए टार्गेटेड टैक्स राहत दी जाती, तो अफोर्डेबिलिटी और खरीदारों का भरोसा और मजबूत होता। उन्होंने कहा कि हाउसिंग-लेड ग्रोथ की बुनियाद तो तैयार है। लेकिन डिमांड साइड पर ज्यादा तीखे कदम उठाए जाते, तो रफ्तार और व्यापक असर दोनों तेज हो सकते थे।
बजट में किसी नई राहत का फैसला ऐसे वक्त पर आया है, जब देश के कई हिस्सों में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर हैं और ऊंची ब्याज दरों के चलते होम लोन की EMI आम परिवारों के बजट पर दबाव डाल रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि अब बजट के बाद अपना खरीदने का प्लान करना चाहिए या किराए पर रहने में समझदारी रहेगी।
घर खरीदें या किराए पर रहें
घर खरीदना या किराए पर रहना सिर्फ महीने के खर्च का मामला नहीं है। यह फैसला लंबे समय की सुरक्षा, स्थिरता, आजादी और मानसिक सुकून से जुड़ा होता है।
एक तरफ घरों की कीमतें ऊंची हैं और दूसरी तरफ किराया लगातार बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में यह समझना जरूरी हो जाता है कि खरीदने और किराए पर रहने- दोनों के फायदे और नुकसान क्या हैं। इससे अपनी फाइनेंशियल स्थिति और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से फैसला लेने में सहूलियत होती है।
घर खरीदने के फायदे क्या हैं
घर खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि प्रॉपर्टी आपकी होती है। यह एक लॉन्ग टर्म एसेट है, जिसकी कीमत समय के साथ बढ़ सकती है और इससे वेल्थ क्रिएशन में मदद मिलती है।
होम लोन की EMI आमतौर पर फिक्स रहती है, जबकि किराया हर साल बढ़ सकता है। अपने घर में आप मनचाहे बदलाव कर सकते हैं, रिनोवेशन करा सकते हैं और एक्सटेंशन भी कर सकते हैं। साथ ही, यह भी फिक्र भी नहीं रहती कि मकान मालिक जब मर्जी घर खाली करने को बोल देगा।
BankBazaar के CEO आदिल शेट्टी कहते हैं, 'घर खरीदना लॉन्ग टर्म एसेट बनाने में मदद करता है। इससे प्राइस अप्रिसिएशन, फिक्स EMI और होम लोन पर टैक्स बेनिफिट मिलते हैं। भारतीय परिवारों के लिए यह भावनात्मक सुरक्षा और स्थिरता भी देता है।'
घर खरीदने के नुकसान भी समझना जरूरी
घर खरीदने के साथ कई बड़े खर्च जुड़े होते हैं। रजिस्ट्रेशन, स्टांप ड्यूटी और डाउन पेमेंट जैसे शुरुआती खर्च काफी ज्यादा होते हैं। इसके अलावा मेंटेनेंस और रिपेयर की जिम्मेदारी भी आपकी ही होती है।
आदिल शेट्टी आगे कहते हैं, 'इन फायदों की एक कीमत भी होती है। शुरुआती खर्च ज्यादा होते हैं, मेंटेनेंस लगातार चलता रहता है और प्रॉपर्टी लिक्विड नहीं होती। शुरुआती सालों में यह कैश फ्लो पर दबाव डाल सकती है। 20-30 साल का होम लोन आपको एक जगह बांध देता है, जबकि करियर, इनकम और शहर बदलते रहते हैं।'
इसके अलावा, जब तक पूरा लोन चुकता नहीं होता, तकनीकी रूप से घर बैंक के पास गिरवी रहता है। जरूरत पड़ने पर प्रॉपर्टी बेचने में भी समय लगता है, जिससे जल्दी मूव करना मुश्किल हो जाता है।
किराए पर रहने के फायदे क्या हैं
किराए पर रहने का सबसे बड़ा फायदा है कम शुरुआती खर्च। आमतौर पर सिर्फ सिक्योरिटी डिपॉजिट और कुछ महीने का किराया देना होता है।
किराए पर रहना नौकरी, परिवार या लाइफस्टाइल में बदलाव के हिसाब से आसानी से जगह बदलने की आजादी देता है। बड़ी मरम्मत और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी आमतौर पर मकान मालिक की होती है। साथ ही, प्रॉपर्टी की कीमत गिरने का जोखिम भी किरायेदार पर नहीं आता।
आदिल शेट्टी के मुताबिक, 'किराए पर रहना मासिक खर्च को कंट्रोल में रखता है और ज्यादा लचीलापन देता है। लोग ऑफिस के करीब रह सकते हैं, आसानी से शहर बदल सकते हैं और बची हुई रकम को फाइनेंशियल एसेट्स में निवेश कर सकते हैं। शुरुआती कमाई के दौर में यह तरीका ज्यादा सूट करता है।'
किराए पर रहने के नुकसान क्या हैं
किराया देने से कोई एसेट नहीं बनता। सैलरी बढ़े या न बढ़े, किराया हर 11 महीने में बढ़ सकता है। दिल्ली-NCR जैसे इलाकों में यह बढ़ोतरी अक्सर 10% तक देखी जाती है।
किराए के घर में बदलाव की आजादी सीमित होती है। कई मकान मालिक देर से आने-जाने या पालतू जानवर रखने की भी इजाजत नहीं देते। लीज खत्म होने पर मकान मालिक घर खाली कराने या प्रॉपर्टी बेचने का फैसला भी कर सकता है। लंबे समय में किराया देना, बिना किसी रिटर्न के, खरीद से ज्यादा महंगा साबित हो सकता है।
आपको कैसे करना चाहिए फैसला?
घर खरीदने या किराए पर रहने का फैसला सामाजिक दबाव में नहीं, बल्कि अपनी फाइनेंशियल तैयारी देखकर लेना चाहिए।
आदिल शेट्टी कहते हैं, टशुरुआती सालों में किराए पर रहते हुए नियमित निवेश करना फाइनेंशियल मजबूती बनाता है। घर तभी खरीदना चाहिए जब इनकम स्थिर हो, लोकेशन को लेकर स्पष्टता हो और EMI घरेलू बजट में आराम से फिट बैठती हो। घर आपकी दौलत बढ़ाए, उस पर बोझ न बने।'
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