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क्या सालाना 10 लाख रुपये रेंट के लिए 4.8 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदना समझदारी है?

आप फ्लैट खरीदें या कोई स्टॉक खरीदें उसकी वैल्यूएशन काफी मायने रखती है। सही वैल्यूएशन या कम वैल्यूएशन पर किसी एसेट को खरीदने पर उसकी कॉस्ट जल्द रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है। ज्यादा वैल्यूएशन पर खरीदने पर कॉस्ट रिकवर करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 19, 2025 पर 1:02 PM
क्या सालाना 10 लाख रुपये रेंट के लिए 4.8 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदना समझदारी है?
एक्स्पर्ट्स का कहना है किसी एसेट की सही वैल्यूएशन को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है।

पिछले 2-3 सालों में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान में पहुंच गई हैं। दिल्ली और मुंबई में 2 बीएचके या 3 बीएचके फ्लैट्स की कीमत करोड़ से ऊपर है। सवाल है कि क्या इतने महंगे फ्लैट्स खरीदना समझदारी है? मनीधन डॉट कॉम के फाउंडर और सेबी-रजिस्टर्ड एडवाइजर सुजीत एस एस के एक लिंक्डइन पोस्ट से इस मसले पर नई बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने उनके इस पोस्ट की तारीफ की है तो कुछ इसके खिलाफ में दिखे हैं। आखिर वायरल हो चुके इस पोस्ट में सुजीत ने क्या लिखा है?

पीई रेशियो से एसेट की वैल्यूएशन का पता चलता है

सुजीत के एक फ्लैट खरीदने और एक स्टॉक खरीदने की तुलना की है। उन्होंने यूजर्स से पूछा है कि मान लीजिए आप 4.8 करोड़ रुपये का एक फ्लैट खरीदते हैं जिससे किराए के रूप में आपको सालाना 10 रुपये की आमदनी हो सकती है। इस आधार पर इसका पीई रेशियो 48 आता है। इसका मतलब है कि आपको किराए की इनकम से फ्लैट की कॉस्ट रिकवर करने में 48 साल का समय लगेगा। इस कैलकुलेशन में यह माना गया है कि फ्लैट का किराया स्थिर रहता है।

ज्यादा वैल्यूएशन तो कॉस्ट रिकवर करने में ज्यादा टाइम

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