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इनकम टैक्स के नए और पुराने ITR का आपके लिए क्या है मतलब? यहां जानिए अपने हर सवाल के जवाब

नौकरी करने वाले हर टैक्सपेयर के लिए इनकम टैक्स की पुरानी और नई रीजीम के बारे में फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में फैसला ले लेना जरूरी है। CBDT ने इस बारे में 5 अप्रैल को सर्कुलर जारी किया है। इसमें इस बारे में डिटेल में बताया गया है

Abhishek Anejaअपडेटेड Apr 13, 2023 पर 4:13 PM
इनकम टैक्स के नए और पुराने ITR का आपके लिए क्या है मतलब? यहां जानिए अपने हर सवाल के जवाब
नई टैक्स रीजीम में पुरानी टैक्स रीजीम के मुकाबले टैक्स के रेट्स कम हैं। लेकिन, यह सबके लिए फायदेमंद नहीं है, क्योंकि पुरानी रीजीम में टैक्सपेयर्स को कई तरह के टैक्स बेनेफिट्स मिलते हैं।

फाइनेंशियल ईयर 2022-23 इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम डिफॉल्ट टैक्स (default tax regime) रीजीम थी। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट 2023 में इनकम टैक्स कैलकुलेशन के तरीके में बड़े बदलाव का ऐलान किया। इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 115BAC के तहत नई टैक्स रीजीम के पूरे स्ट्रक्चर को बदल दिया गया। यह फाइनेंशियल ईयर 2023-24 से लागू हो गया है। साथ ही नए वित्त वर्ष से नई टैक्स रीजीम डिफॉल्ट टैक्स रीजीम हो गई है। इसका मतलब है कि टैक्सपेयर को नई टैक्स रीजीम के तहत अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा। अगर वह पुरानी रीजीम का इस्तेमाल करना चाहता है तो ITR फाइलिंग की अंतिम तारीख से पहले इसके बारे में बताना होगा।

क्यों जरूरी है अपनी चॉयस बताना?

इनकम टैक्स कानून के तहत एंप्लॉयर्स (कंपनियों) के लिए एंप्लॉयीज को चुकाई जाने वाली सैलरी पर TDS काटना जरूरी है। एंप्लॉयर्स इस बात को लेकर उलझन में थे कि ओल्ड टैक्स रीजीम या नई टैक्स रीजीम के तहत TDS का कैलकुलेशन किस तरह होगा। इस बारे में कई प्रतिनिधिमंडलों के मिलने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 5 अप्रैल, 2023 को सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलेर में कहा गया है कि एप्लॉयर्स को एंप्लॉयीज से यह पूछना होगा कि वे फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के दौरान TDS का डिडक्शन ओल्ड रीजीम के तहत चाहते हैं या नई रीजीम के तहत। अगर कोई एंप्लॉयी ओल्ड या नई रीजीम में से किसी एक बारे में नहीं बताता है तो टीडीएस काटने के लिए नई टैक्स रीजीम का इस्तेमाल किया जाएगा।

इन सवालों के जवाब से मिलेगी मदद

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