
बिहार में समस्तीपुर लोकसभा सीट का मुकाबला काफी दिलचस्प है। यहां से नीतीश कुमार की सरकार के मंत्रियों के बेटे और बेटी के बीच मुकाबला है। इस सीट से एनडीए की उम्मीदवार शांभवी चौधरी हैं, जिन्हें लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने टिकट दिया है। 25 साल की शांभवी बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री अशोक चौधरी की बेटी हैं। चौधरी न सिर्फ बिहार सरकार में मंत्री हैं, बल्कि नीतीश कुमार के बेहद करीबी भी हैं
लोकसभा भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण अंग है जो भारतीय संघ का लोकतंत्रिक प्रतिनिधित्व करता है। यह देश के लोक सेवा क्षेत्र के सदस्यों के चयन के लिए जिम्मेदार होता है। लोकसभा के सदस्यों को जनता के माध्यम से निर्वाचित किया जाता है और वे लोकतंत्र के मूल तत्वों को प्रतिष्ठित करते हैं, जैसे कि लोकतंत्र, सामान्य जनता के प्रति जिम्मेदारी, और शासन के लिए जनता की आवाज को सुनना। लोकसभा की सभी कानूनों की विधायिका शक्ति है और यह केंद्र सरकार के लिए विशेष महत्व रखती है। लोकसभा में विधायकों की संख्या की सीमा 552 तक होती है।
लोकसभा चुनाव का आयोजन हर पांच साल में होता है। हालांकि अगर कभी केंद्र की सरकार पहले वक्त से पहले गिर जाती है तो भी लोकसभा के चुनाव कराया जाता है।
18 साल से ज्यादा उम्र वाले लोग लोकसभा में वोट डाल सकते हैं। वोट डालने के लिए वोटर आईडी कार्ड होना जरूरी है। किसी भी कानूनी कारणों जैसे मानसिक असंतुलन, कुछ अपराधों के लिए सजा या निर्वासन के कारण, वोटिंग से अयोग्य होने पर वोट डालने का अधिकार नहीं है। वोट डालने के लिए आपके पास वोटर कार्ड होना जरूरी है।
लोकसभा चुनाव में कोई भी भारतीय नागरिक उम्मीदवार बन सकता है जो निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करता है। भारतीय नागरिकता, कम से कम 25 वर्ष की आयु, और कोई अपराधिक या कानूनी अयोग्यता नहीं।
लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग की मुख्य भूमिका है चुनाव प्रक्रिया का प्रबंधन और सुरक्षा करना। इसकी जिम्मेदारी में मतदान, गणना, और चुनावी उल्लंघनों के खिलाफ कार्रवाई शामिल होती है। उसका उद्देश्य निष्पक्ष और नियमित चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।

आखिर कैसे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच बातचीत बनी। कांग्रेस और सपा के बीच तीन बैठकें हुईं, RLD ने भी साथ छोड़ दिया, तब जाकर कांग्रेस को ये समझ आया उसे नरम रुख अपनाना और सहयोगियों के सामने झुकना भी होगा। माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी समेत पार्टी की टॉप लीडर्शिप को ये समझाया कि इस समय अंहकार से ज्यादा जीत जरूरी है, इसलिए थोड़ा समझौता करना हमारे लिए अच्छा होगा। यूपी में कांग्रेस सिर्फ 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बाकी की 63 सीटों पर समाजवादी पार्टी और दूसरे साथी दल अपने चेहरे उतारेंगे। दिल्ली और पंजाब में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस के कुछ विरोधियों के नाराज होने के बावजूद, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जिस समझौते पर सहमत हुए थे।