विधान सभा चुनाव 2026

बहुमत (148)
BJP
207
TMC+
80
OTH
04
INC
02
बहुमत (118)
TVK
108
DMK+
73
AIADMK+
53
OTH
00
AllianceParty
बहुमत (71)
UDF
100
LDF
35
NDA
03
OTH
02
AllianceParty
बहुमत (64)
BJP+
102
INC+
21
AIUDF
02
OTH
01
बहुमत (16)
BJP+
18
INC+
06
OTH
06

विधानसभा चुनाव

Hindustan Zinc Shares: चांदी में तूफानी तेजी से हिंदुस्तान जिंक के शेयर 3% उछले, सिल्वर ETFs ने भी बनाया रिकॉर्ड

Hindustan Zinc Shares: चांदी की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ तेजी से हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc) के शेयरों में भी बुधवार 14 जनवरी को उछाल देखने को मिली। कंपनी के शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 3% तक चढ़कर 647.70 रुपये तक पहुंच गए। यह शेयर में लगातार चौथा दिन बै, जब कंपनी के शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं

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विधानसभा चुनाव FAQs

भारत में विधानसभा चुनाव क्या हैं और ये क्यों कराए जाते हैं?

भारत में होने वाले विधानसभा चुनाव राज्य स्तर पर सरकार चुनने की प्रक्रिया है। इसके माध्यम से राज्य की जनता अपने प्रतिनिधि (MLA - विधायक) चुनती है। जिस दल या गठबंधन को विधानसभा की कुल सीटों में से आधे से अधिक (बहुमत) सीटें मिलती हैं, वह राज्य में सरकार बनाता है और उसका नेता मुख्यमंत्री बनता है। यह चुनाव सामान्यतः हर 5 साल में आयोजित किए जाते हैं।

विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु और योग्यता क्या है?

भारत के संविधान के अनुसार, विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। इसके अलावा उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए। वह किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में एक पंजीकृत मतदाता (Voter) होना चाहिए। वह सरकार के अधीन किसी 'लाभ के पद' (Office of Profit) पर नहीं होना चाहिए। वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो और न्यायालय द्वारा अयोग्य घोषित न किया गया हो।

एक व्यक्ति अधिकतम कितनी सीटों पर चुनाव लड़ सकता है?

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act) के अनुसार, एक व्यक्ति एक ही समय में अधिकतम 2 निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ सकता है। अगर वह दोनों सीटों पर जीत जाता है, तो उसे एक निश्चित समय के भीतर एक सीट छोड़नी पड़ती है।

क्या जेल में बंद व्यक्ति मतदान कर सकता है या चुनाव लड़ सकता है?

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 62(5) के अनुसार, जेल में बंद व्यक्ति (विचाराधीन कैदी या सजायाफ्ता) मतदान नहीं कर सकता। हालांकि, चुनाव लड़ने के मामले में नियम अलग हैं। अगर किसी व्यक्ति को 2 साल या उससे अधिक की सजा हुई है, तो वह रिहाई के 6 साल बाद तक चुनाव नहीं लड़ सकता। लेकिन अगर मामला विचाराधीन है और व्यक्ति जेल में है, तो वह चुनाव लड़ सकता है।

विधानसभा चुनाव में 'NOTA' का क्या महत्व है?

NOTA (None of the Above) यानी 'इनमें से कोई नहीं'। यह विकल्प उन मतदाताओं के लिए है जो अपने चुनाव क्षेत्र के किसी भी उम्मीदवार को पसंद नहीं करते। NOTA का बटन दबाकर मतदाता किसी भी उम्मीदवार को वोट न देने के अपने अधिकार का प्रयोग कर सकता है। हालांकि, तकनीकी रूप से NOTA के वोट चुनाव परिणाम को रद्द नहीं करते (भले ही NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिलें, दूसरे नंबर वाले उम्मीदवार को ही विजेता माना जाता है), लेकिन यह राजनीतिक दलों को बेहतर उम्मीदवार उतारने का संदेश देता है।

विधानसभा चुनाव 2026

Election 2023

राज्यों में विधानसभा चुनाव कब होने वाले हैं?

वर्ष 2026 भारतीय राजनीति के लिए अहम साल हैं। इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। ये चुनाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय दलों के लिए एक बड़ा लिटमस टेस्ट भी साबित होंगे।

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। 2021 की प्रचंड जीत के बाद, TMC के सामने अपने गढ़ को बचाने की चुनौती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछले चुनावों की तुलना में अधिक आक्रामक होकर सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे इस बार भी चुनाव के केंद्र में रहने की संभावना है।

दक्षिण भारत में तमिलनाडु और केरल के चुनाव बेहद दिलचस्प होंगे। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाला DMK गठबंधन अपनी कल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता बरकरार रखने की उम्मीद कर रहा है। वहीं, एआईएडीएमके (AIADMK) अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश करेगी।

केरल में वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) ने 2021 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर इतिहास रचा था। क्या मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन तीसरी बार 'एंटी-इनकंबेंसी' को मात दे पाएंगे या कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF सत्ता में वापसी करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

असम में बीजेपी अपनी विकासोन्मुख नीतियों और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों के साथ तीसरे कार्यकाल की उम्मीद करेगी। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी सत्ता के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिलेगा।

साल 2026 के ये चुनाव राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बीच शक्ति संतुलन को पुनर्परिभाषित करेंगे। जहां एक ओर बीजेपी अपने दक्षिण विस्तार की रणनीति पर जोर देगी, वहीं विपक्षी दल क्षेत्रीय पहचान और स्थानीय मुद्दों के आधार पर अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेंगे। इन चुनावों के नतीजे आगामी वर्षों के लिए भारत के राजनीतिक विमर्श को नई दिशा देंगे।