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सुभाष चंद्रा ने वित्त मंत्री से लगाई थी यह गुहार, Zee-Sony Merger रद्द होने से पहले ही कर दी थी शिकायत

जी और सोनी के बीच विलय यानी Zee-Sony Merger से जुड़ा सौदा रद्द हो गया और सोनी ने आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान कर दिया है। इस ऐलान से पहले जी एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment) के प्रमोटर सुभाष चंद्रा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस डील को लेकर गुहार लगाई थी। जानिए उन्होंने इस पत्र में क्या लिखा है और सेबी की क्या शिकायत की है?

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 24, 2024 पर 11:44 AM
सुभाष चंद्रा ने वित्त मंत्री से लगाई थी यह गुहार, Zee-Sony Merger रद्द होने से पहले ही कर दी थी शिकायत
Zee-Sony Merger: जी और सोनी के बीच विलय की बातचीत दो साल से अधिक समय से चल रही है और अब यह सौदा सोमवार को रद्द हो गया।

जी और सोनी के बीच विलय यानी Zee-Sony Merger से जुड़ा सौदा रद्द हो गया है और सोनी ने आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान कर दिया है। इस ऐलान से पहले जी एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment) के प्रमोटर सुभाष चंद्रा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस डील को लेकर गुहार लगाई थी। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक सुभाष चंद्रा ने वित्त मंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था ताकि जी एंटरटेनमेंट के माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के हितों की रक्षा की जा सके। जी और सोनी के बीच विलय की बातचीत दो साल से अधिक समय से चल रही है और अब यह सौदा सोमवार को रद्द हो गया।

सोनी ने जी से टर्मिनेशन फीस के रूप में 9 करोड़ डॉलर भी मांगे हैं। सौदे के रद्द होने पर एनालिस्ट्स ने जी एंटरटेनमेंट के शेयरों की तगड़ी डाउनग्रेडिंग कर दी और टारगेट प्राइस भी 50 फीसदी तक घटा दिया।

SEBI को लेकर किया यह अनुरोध

सुभाष चंद्रा ने वित्त मंत्री को जो पत्र लिखा है, उसमें आरोप लगाया गया है कि सोनी के साथ विलय के सौदे को रोकने की लगातार कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि बाजार नियामक सेबी के जांच की कोई चिंता नहीं है लेकिन नए नोटिस की टाइमिंग को लेकर जरूर है। उनका कहना है कि वे किसी भी संदेह को लेकर सेबी को जांच रोकने को नहीं कर रहे हैं लेकिन नए नोटिस में ऐसा कोई पॉइंट हीं नहीं है जो पहले से ही कंपनी के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी पॉइंट हैं, वह सारी डिटेल्स पहले ही सेबी को दी जा चुकी है। इसके आगे उन्होंने कहा कि सेबी और या कोई भी और अगर जांच को प्रभावित करते हैं तो इससे जी के शेयरहोल्डर्स को तगड़ा वित्तीय झटका लगेगा।

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